Shailja Gupta

Add To collaction

हरी चूड़ियां .... लम्हें

हरी चूड़ियां:-लम्हें

लम्हे जो तुम संग बीते प्रिय कैसे मैं व्यक्त करूंँ,
उस पल के एहसासों को शब्दों में कैसे अभिव्यक्त करूंँ।
जो हरी चूड़ियां तुमने इश्क में मेरे लाई थी, 
मनिहारी बन मेरे कोमल हाथों में पहनाई थी ।
खन खन खनकती हरी चूड़ियां तेरे इश्क के गीत सुनाती है।
बैरन सखियां छेड़े मुझको हर पल याद तुम्हारी आती है।
यह खनखन खनकती हरी चूड़ियां मुझसे तुम्हारी ही बातें करती है।
बातें तुम्हारी मीठी चूडियों की खनक सी कानों में रस भरती है।
तनहाई में मेरी यह मुझको तेरी याद दिलाती है।
हाथों में छुअन इनकी... दिल को मेरे छू जाती है।
 इन्हें बड़े जतन से पहनती हूं
और संभाल कर उतारती हूं।
अपनी उंगलियों के पोरों से ....
जब छूती हूं इन्हें तो क्या एहसास मेरा ये तुम्हारे दिल तक पहुंच पाता है??
जो तुम लाए थे ये हरी चूड़ियां चटकती हैं 
तो कहीं हृदय चटक सा जाता है।
टूटती हैं तो.. 
यह दिल भी टूट सा जाता है 
आंसू भी इन आंखों से लहू सा निकल ही आता है।
दूरी तेरी.......तब दिल को चुभन दे जाती है।
लौट आओ कि ये हरी चूड़ियां... 
....वो लम्हे नहीं भुलाने देती है।
शैलजा ☘️

   4
3 Comments

Gunjan Kamal

14-Sep-2021 06:01 AM

Wah bahut khoob

Reply

Zakirhusain Abbas Chougule

14-Sep-2021 12:35 AM

Nice

Reply

Seema Priyadarshini sahay

14-Sep-2021 12:31 AM

👌👌👌👌👌

Reply